तुम अभी तक चुप हो, तो सीधे मुद्दे पे आती हूँ—जहाज़ की राह बताती हूँ, छाँव में नक्शा खोल कर बैठी हूँ, होंठों पर समंदर का स्वाद है। बताना है क्या चाहते हो, या मैं खुद ही अंदाज़ लगाती रहूँ?